Skip to main content

Ganesha Strotram

संकट नाशन गणेश स्तोत्र – हिंदी अर्थ सहित (श्लोकवार)

🕉️ संकट नाशन गणेश स्तोत्र – हिंदी अर्थ सहित (श्लोकवार)

श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति कहा जाता है। यह संकट नाशन गणेश स्तोत्र श्री नारद पुराण से लिया गया है और इसका नित्य पाठ करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, तथा विद्या, धन, संतान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। नीचे प्रत्येक श्लोक के साथ उसका सरल हिंदी अर्थ भी दिया गया है।
श्लोक 1

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये ॥१॥

अर्थ:

जो भक्त प्रतिदिन सिर झुकाकर माता गौरी के पुत्र भगवान विनायक को प्रणाम करता है और श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण करता है, उसे दीर्घायु, समस्त इच्छाओं की पूर्ति तथा अर्थ-सिद्धि की प्राप्ति होती है।

श्लोक 2

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥२॥

अर्थ:

भगवान गणेश के बारह पवित्र नामों में से प्रथम चार नाम हैं — वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूँड वाले), एकदन्त (एक दाँत वाले), कृष्णपिङ्गाक्ष (भूरी-काली आँखों वाले) और गजवक्त्र (हाथी के समान मुख वाले)।

श्लोक 3

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥३॥

अर्थ:

अगले चार नाम हैं — लम्बोदर (बड़े उदर वाले), विकट, विघ्नराजेन्द्र (समस्त विघ्नों के स्वामी) और धूम्रवर्ण (धुएँ के समान रंग वाले)।

श्लोक 4

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥४॥

अर्थ:

शेष चार नाम हैं — भालचन्द्र (मस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले), विनायक, गणपति और गजानन। इस प्रकार भगवान गणेश के कुल बारह नाम पूर्ण होते हैं।

श्लोक 5

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥५॥

अर्थ:

जो व्यक्ति प्रातः, मध्याह्न और सायं — इन तीनों संध्याओं के समय भगवान गणेश के इन बारह नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसे कभी भी विघ्नों का भय नहीं सताता। हे प्रभु, यह स्तोत्र समस्त कार्यों में सिद्धि प्रदान करने वाला है।

श्लोक 6

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥६॥

अर्थ:

विद्या की कामना करने वाले को विद्या, धन की कामना करने वाले को धन, संतान की कामना करने वाले को पुत्र, तथा मोक्ष की कामना करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

श्लोक 7

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥७॥

अर्थ:

जो व्यक्ति इस गणपति स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक जप छह महीने तक निरंतर करता है, उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है, और यदि यह जप पूरे एक वर्ष तक किया जाए तो निश्चित रूप से सिद्धि प्राप्त होती है — इसमें कोई संशय नहीं है।

श्लोक 8

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥८॥

अर्थ:

जो व्यक्ति इस स्तोत्र को लिखकर श्रद्धापूर्वक आठ ब्राह्मणों को समर्पित करता है, उसे भगवान गणेश की कृपा से समस्त विद्याओं की प्राप्ति होती है।

🌸 ॐ गं गणपतये नमः 🌸

इति श्री नारदपुराणे संकटविनाशनं श्री गणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम्।

इस स्तोत्र का महत्व

यह स्तोत्र भगवान गणेश के बारह नामों का स्मरण कराते हुए भक्त को समस्त विघ्नों, बाधाओं और कष्टों से मुक्ति दिलाता है। प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से विद्या, धन, संतान सुख और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी अथवा किसी भी शुभ अवसर पर इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।